गौ रक्षा जरुरी है या मनुष्य का जीवन

गौ तस्करी के नाम पर राजस्थान में कुछ लोगो को इतना पीटा गया की उनमे से एक की मौत हो गयी I इन लोगो ने किसी जानवर को नहीं मारा था, किसी जानवर का मांस इनसे नहीं पकड़ा गया I ये सिर्फ गाडी में जानवर ले जा रहे थे I सिर्फ इस बात को लेकर इनकी पिटाई की गयी कि गाडी में गाये थी I
गाय हिन्दुओ के लिए पूजनीय है और एक कृषक और हिन्दू परिवार से होने के नाते मैं भी मानता हू कि गाय हमारी संस्कृति का एक हिस्सा है I पर फिर भी मैं किसी मनुष्य के जीवन को जानवर के जीवन से कहीं मूल्यवान मानता हूँ I क्या हम ऐसे समाज कि तरफ जा रहे हैं जहा इंसान से ज्यादा जानवर कि जान कि कीमत है I वो भी तब जब उस जानवर को मारा ही नहीं गया था I
हम इस्लाम को कोसते हैं कि कुरआन, शरीयत के नाम पर पूरी दुनिया में क़त्लो गैरत हो रही है और ये बिलकुल सही भी है, आधुनिक समाज में धर्म ने नाम पर किसी कि भी हत्या को जायज़ नहीं ठहराया जा सकता है I हम हिन्दू धर्म को सहिष्णु बताते हैं, पर अगर ऐसी ही घटनाएं होती रहीं तो हम में और ISIS या तालिबान में क्या फर्क रह जाता है, क्योंकि इंसान को मारने के पीछे वजह तो एक ही है, मकसद भी एक ही है 'धर्म', बस नाम अलग अलग है Iयही अगर हिन्दू धर्म करे तो भी वो उतना ही गलत है I पर हम कुछ बोल नहीं रहे हैं क्योंकि हमे लगता है जो मरा है वो हमारे धर्म का नहीं है I
आज हिन्दू मुस्लिम के बीच पड़ी खाई इतनी बढ़ती जा रही है जिसे शायद हम फिर कभी भर नहीं पाएंगे I पीढ़ियो में जब धर्म का जहर जब घुलता है तो सदियाँ उसको साफ़ करने में खप जाती है I एक कट्टरवाद दूसरे कट्टरवाद को जन्म देता है और मरते हम हैं, फसल काटते हैं धर्म के ठेकेदार I
इसका उदाहरण पाकिस्तान है जिसने 'इस्लाम', यानी धर्म को देश के कानून का आधार बताया आज पाकिस्तान एक देश के तौर पर लगभग खत्म हो चुका है I हम थोड़ी बहुत प्रगति इसलिए कर पाए क्योंकि आज़ादी के बाद हमने एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र कि नीवं रखी थी I पर अब हम भी पाकिस्तान कि राह पर चल पड़े हैं, अगर हम नहीं रुके तो यही हमारा हश्र भी होगा I
धर्म ईश्वर और मनुष्य के बीच का मामला होना चाहिए I आधुनिक समाज कि नीतियों में धर्म अप्रासंगिक है, चाहे कोई भी हो, जैसे जैसे विज्ञानं तरक्की करेगा, धर्म के आस्तित्व खत्म होगा, यह बात कड़वी है पर हमे स्वीकारनी होगी i
अभी हम जवान है लेकिन इस बात का डर हमेशा सताता रहता है कि कल हमारी अगली पीड़ी हमसे ये सवाल जरूर पूछेगी कि ये कैसा भारत हमने उन्हें सौंपा है I इसिलए ये हमारी पीड़ी सबसे बड़ी ज़िम्मेदारी भी है और चुनोती भी कि हम अपने अंदर कट्टरवाद का ज़हर न पनपने दे, फिर चाहे वो हिन्दू हो या मुसलमान I
सुमन ठाकुर, अधिवक्ता, दिल्ली उच्च न्यायलयhttps://www.facebook.com/suman.thakur.39904

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