सरकार ने लगाई आदमी की जान की कीमत 10 लाख रूपये I किसका फायदा...किसका नुक्सान ...?

सरकार ने लगाई आदमी की जान की कीमत 10 लाख रूपये I किसका फायदा...किसका नुक्सान ...?
सरकार ने मोटर व्हीकल एक्ट में कुछ बदलाव किये हैं जिनको की आज लोकसभा से पास कर दिया गया है I इसमें सबसे ज्यादा चौकाने वाला है 'थर्ड पार्टी इन्शुरन्स' में किया गया बदलाव I नए नियम के तहत अब अगर किसी गाडी से कोई तीसरा व्यक्ति मर जाता है जो उसमे सफर नहीं कर रहा था तो उसे 10 लाख से ज्यादा का मुआवजा नहीं मिलेगा, घायल होने की सिथिति में यह सीमा 5 लाख निर्धारित की गयी है I
मौजूदा कानून में 'थर्ड पार्टी' मुआवजे की कोई निर्धारित सीमा नहीं है I व्यक्ति के व्यवसाय, उसकी आयु, उसकी आमदनी को देखते हुए, कोर्ट मुवावजे की राशि निर्धारित करता है I यानी की अगर किसी प्रोफेशनल जैसे डॉक्टर, इंजीनीर, IT प्रोफेशनल, बिज़नेसमन,...की मृत्यु होती है तो उसका मुआवजा १ करोड़ से भी ऊपर जा सकता है... यहां तक की एक दिहाड़ी दार मजदूर को भी आज न्यनतम वेतन के हिसाब से २० लाख से ३० लाख तक का मुआवजा कोर्ट देता है I मैंने खुद मोटर व्हीकल एक्ट के कई केस लड़े हैं, और किसी भी केस में दुर्घटना के शिकार हुए आदमी को २० लाख से काम मुआवजा नहीं मिला है I
इस कानून के लागु होने के बाद दुर्घटना में मरने वाले की मौत पर उसके परिजनों को १० लाख से ज्यादा नहीं मिलेंगे I यानी की कोई भी व्यक्ति चाहे कितना भी पड़ा लिखा हो, कितना कमाता हो... सरकार ने उसकी जान की कीमत १० लाख रूपये लगाईं है बस I
मै ये भी बता दू की ऐसा किसके दबाव में किया गया है, दरसल भारत सरकार पर प्राइवेट इन्शुरन्स कम्पनिया लगातार ये दबाव बना रही है, की मुआवजे की राशि निर्धारित न होने की वजह से उन्हें उपभोक्ता को लूटने का पूरी तरह से मौका नहीं मिल रहा है और उन्हें आखिर तक ये पता नहीं चल पाता की बैलेंस शीट में उनका मुनाफा कितना हुआ हैं I कम्पनिया चाहती हैं की मुआवजे की राशि निर्धारित की जाए ताकि उनकी उनकी देनदारी फिक्स की जा सके I अब भारीतय बाजार को सरकार ने लूट के लिए पूरी तरह से खोल दिया है I
आने वाले दिनों में हम और इंटरनेशनल इन्सुरन्स कंपनियों का जमावड़ा भारतीय बाजार में देखेंगे I
परिवहन मंत्री नितिन गडकरी जी ने ये बदलाव निजी इन्शुरन्स कंपनियों को फायदा पहुंचाने की नियत से किया हैं इसमें कोई दो राय नहीं हैं I कानून में ये बदलाव बिकुल जनविरोधी हैं जिसका नुक्सान देश हर नागरिक को झेलना पड़ेगा I हम इस कानून का कडा विरोध करते हैं और इसे वापस लेने की पुरजोर मांग करते हैं I
देश की राष्ट्रवादी सरकार का ये फैसला किस लिहाज से देश हित में है इस पर चर्चा आमंत्रित है ताकि हमारे ऊपर सरकार के हर फैसले के अंधविरोध का लांछन न लगाया जा सके I
#MVACT, Third Party Insurance,  

Suman ThakurAdvocate
Delhi High Court
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