सरकार फीस वृद्धि वापस ले
वर्तमान शाषन व्यवस्था में शिक्षा एक कमोडिटी में तब्दील हो रही है, जिसके पास पैसा है वो ही इसे खरीद सकता है I इसका ताजा उदाहरण है पंजाब यूनिवर्सिटी द्वारा हाल ही में फीस में की गई बेतहाशा वृद्धि I B.Pharma की फीस जहां पहले 5,000 रूपये थी अब 50,000 /- रूपये कर दी गयी है I डेंटल की फीस में 85,000 हजार की बढ़ोतरी की गयी है I पत्रकारिता के कोर्सेज की फीस 5000 से बढ़ाकर 30,000 /- रूपये कर दी गयी है I ऐसे ही दूसरे कोर्सेज की फीस बड़ाई गयी हैं I
पंजाब यूनिवर्सिटी एक मूर्खतापूर्ण तर्क ये भी दे रही है की वो स्टूडेंट्स को कैंपस में पार्ट टाइम जॉब मुहैया करवाएगी और इस पैसे से स्टूंडेंटस अपनी फीस दे सकेंगे I यानी की गरीब की बच्चा नौकरी भी करेगा अपनी फीस भरने के लिए और पैसे वाले की औलाद सिर्फ पड़ने आएगी I ऐसे में हम कैसे कह सकते हैं की सबको शिक्षा के सामान अवसर दे रहे हैं I गौर हो की पंजाब यूनिवर्सिटी का 40 फीसदी खर्चा पंजाब सरकार और 60 फीसदी खर्चा केंद्र सरकार उठाती है I दोनों ही सरकारे अपनी जिमेदारी से हाथ खींच रही हैं I
ये सरासर गरीब छात्रों को उच्च शिक्षा से वंछित रखने की कोशिश है I जिस समाज में शिक्षा के सामान अवसर नहीं है, वहां हम कैसे समता मूलक समाज की कल्पना कर सकते हैं I सरकारे शिक्षा को बाजार के हाथों बेच रही हैं I जब बड़े बड़े कॉर्पोरेट घरानों को अरबो रुपयों का लोन मिल सकता है और उसे उतनी ही बेशर्मी से माफ़ किया जा सकता है तो स्टूंडेंट्स के शिक्षा का बजट क्यों नहीं दिया जा सकता I
किसी भी सरकार को बुनियादी चीजों पर परखा जाता है, शिक्षा उनमे से एक है, अगर सरकार अपनी जनता को शिक्षा के सामान अवसर नहीं देती है तो उसे नाकाम ही माना जायेगा I शिक्षा हमारा फंडामेंटल राइट हैं, और फीस वृद्धि का ये कदम हमारे फंडामेंटल राइट का उलंघन हैं I
हम शिक्षा के निजीकरण का विरोध करते हैं और सरकार से मांग करते हैं पंजाब यूनिवर्सिटी की फीस वृद्धि को तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाय I हम इस आंदोलन में छात्रों के साथ हैं I इसके साथ ही शिक्षा की व्यवसाईकरण को रोकने के लिए एक अखिल भारतीय आंदोलन करने की जरुरत हैं I
सुमन ठाकुर, अधिवक्ता, दिल्ली उच्च न्यायलय
पंजाब यूनिवर्सिटी एक मूर्खतापूर्ण तर्क ये भी दे रही है की वो स्टूडेंट्स को कैंपस में पार्ट टाइम जॉब मुहैया करवाएगी और इस पैसे से स्टूंडेंटस अपनी फीस दे सकेंगे I यानी की गरीब की बच्चा नौकरी भी करेगा अपनी फीस भरने के लिए और पैसे वाले की औलाद सिर्फ पड़ने आएगी I ऐसे में हम कैसे कह सकते हैं की सबको शिक्षा के सामान अवसर दे रहे हैं I गौर हो की पंजाब यूनिवर्सिटी का 40 फीसदी खर्चा पंजाब सरकार और 60 फीसदी खर्चा केंद्र सरकार उठाती है I दोनों ही सरकारे अपनी जिमेदारी से हाथ खींच रही हैं I
ये सरासर गरीब छात्रों को उच्च शिक्षा से वंछित रखने की कोशिश है I जिस समाज में शिक्षा के सामान अवसर नहीं है, वहां हम कैसे समता मूलक समाज की कल्पना कर सकते हैं I सरकारे शिक्षा को बाजार के हाथों बेच रही हैं I जब बड़े बड़े कॉर्पोरेट घरानों को अरबो रुपयों का लोन मिल सकता है और उसे उतनी ही बेशर्मी से माफ़ किया जा सकता है तो स्टूंडेंट्स के शिक्षा का बजट क्यों नहीं दिया जा सकता I
किसी भी सरकार को बुनियादी चीजों पर परखा जाता है, शिक्षा उनमे से एक है, अगर सरकार अपनी जनता को शिक्षा के सामान अवसर नहीं देती है तो उसे नाकाम ही माना जायेगा I शिक्षा हमारा फंडामेंटल राइट हैं, और फीस वृद्धि का ये कदम हमारे फंडामेंटल राइट का उलंघन हैं I
हम शिक्षा के निजीकरण का विरोध करते हैं और सरकार से मांग करते हैं पंजाब यूनिवर्सिटी की फीस वृद्धि को तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाय I हम इस आंदोलन में छात्रों के साथ हैं I इसके साथ ही शिक्षा की व्यवसाईकरण को रोकने के लिए एक अखिल भारतीय आंदोलन करने की जरुरत हैं I
सुमन ठाकुर, अधिवक्ता, दिल्ली उच्च न्यायलय
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