सत्ता कब सुनेगी किसान की आवाज
दिल्ली में तमिलनाडु से आये किसान धरने पर है, एक महीने से जयादा हो गया, इन्होने सरकार तक अपनी मांगे पहुंचाने के लिए पहले आत्महत्या कर चुके किसनो के नरमुंडो की माला पहनी, फिर चूहे और सांप मुँह में डाल कर विरोध किया, फिर प्रधानमंत्री कार्यालय के सामने नग्न होकर विरोध जताया, आधा सर मुंडवाया, जमीन पर खाना बिखेर कर खाया, उसके बाद का अपना मूत्र पिया और रविवार को इन्होने मानव मल खाकर विरोध करने का प्रण लिया है I
सत्ता इतनी निष्ठुर सवेंदना शुन्य हो जाएगी ये हमने कभी स्वप्न में भी नहीं सोचा था I हमे याद है प्रधान सेवक ने साल २०१४ का चुनाव खुद को एक गरीब का बेटा बताकर जीता था I आज एक गरीब किसान अपने आस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है, सत्ता मौन है I
प्रधान सेवक जी आपने अभी अडानी को अरबो रुपयों का लोन दिया है बांग्लादेश में बिजली का प्रोजेक्ट लगाने के लिए, ये तो किसान है, अन्नदाता है हमारे... इन पर भी कुछ रेहम कर दो I
अगर ये आत्महत्याएं करते रहे तो कौन सा विकास कर लेंगे हम I हम नहीं चाहते ऐसा भारत जो की किसानो की लाशो पर जगमगा रहा हो I कृषि हमारी रीढ़ है, हमारा जीवन शैली है, अगर यही खत्म हो गयी तो क्या बच पायेगा भारत ?
सत्ता इतनी निष्ठुर सवेंदना शुन्य हो जाएगी ये हमने कभी स्वप्न में भी नहीं सोचा था I हमे याद है प्रधान सेवक ने साल २०१४ का चुनाव खुद को एक गरीब का बेटा बताकर जीता था I आज एक गरीब किसान अपने आस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है, सत्ता मौन है I
प्रधान सेवक जी आपने अभी अडानी को अरबो रुपयों का लोन दिया है बांग्लादेश में बिजली का प्रोजेक्ट लगाने के लिए, ये तो किसान है, अन्नदाता है हमारे... इन पर भी कुछ रेहम कर दो I
अगर ये आत्महत्याएं करते रहे तो कौन सा विकास कर लेंगे हम I हम नहीं चाहते ऐसा भारत जो की किसानो की लाशो पर जगमगा रहा हो I कृषि हमारी रीढ़ है, हमारा जीवन शैली है, अगर यही खत्म हो गयी तो क्या बच पायेगा भारत ?
Comments
Post a Comment